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Showing posts from October, 2018

Shiv Puran Ch 198.3: देवी के व्रत तथा उमासंहिता के श्रवण एवं पाठ का माहा...

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Shiv Puran Ch 198.2: पराअम्बा की श्रेष्ठता का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 198.1: देवी के क्रियायोग का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 197.2: देवी के दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि ना...

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Shiv Puran Ch 197.1: देवी के द्वारा दुर्गमासुर का वध.

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Shiv Puran Ch 196.2: देवी उमा द्वारा अपनी महिमा का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 196.1: देवताओं का गर्व दूर करने की लिए तेजपुंजरूपणी उमा का...

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Shiv Puran Ch 195.2: देवी द्वारा शुम्भ वध.

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Shiv Puran Ch 195.1: देवी द्वारा निशुम्भ वध.

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Shiv Puran Ch 194.3: देवी द्वारा धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड तथा रक्तबीज का वध.

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Shiv Puran Ch 194.2: देवी के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत ...

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Shiv Puran Ch 194.1: देवी उमा के शरीर से सरस्वती का आविर्भाव.

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Shiv Puran Ch 193.2: देवी द्वारा महिषासुर का वध.

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Shiv Puran Ch 193.1: देवी के महालक्ष्मी अवतार की कथा.

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Shiv Puran Ch 191.2: मृत्यु को जीत कर अमरत्व प्राप्त करने की साधनाओं का ...

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Shiv Puran Ch 191.1: मृत्यु को जीत कर अमरत्व प्राप्त करने की साधनाओं का ...

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Shiv Puran Ch 190.2: तुंकार साधना तथा उससे प्राप्त होने वाली सिद्धियों क...

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Shiv Puran Ch 190.1: काल को जीतने के उपाय तथा नवधाशब्दब्रह्म साधना और सि...

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Shiv Puran Ch 189: मृत्युकाल निकट आने के लक्षण.

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Shiv Puran Ch 188.3: पापों के प्रायश्चित का सर्वोत्तम उपाय.

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Shiv Puran Ch 188.2: नरकों तथा उनमें गिराने वाले पापों का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 188.1: वेद-पुराण के अध्ययन तथा श्रवण के फल तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 187.2: सत्य बोलने तथा तप की महिमा.

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Shiv Puran Ch 187.1: जल-दान, जलाशय निर्माण तथा वृक्षारोपण की महिमा.

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Shiv Puran Ch 186: यमलोक के मार्ग में सुख प्रदान करने वाले विविध दानों ...

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Shiv Puran Ch 185.2: बलि की आवश्यकता तथा महत्ता का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 185.1: विभिन्न पापों के कारण मिलने वाली नरक यातना का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 184: नरकों की २८ कोटियों तथा १४० भेदों की नामावली.

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Shiv Puran Ch 183: पापियों और पुण्यात्माओं की यमलोक यात्रा.

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Shiv Puran Ch 182.2: नरक में गिराने वाले पापों का वर्णन - 1.

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Shiv Puran Ch 182.1: नरक में गिराने वाले पापों का वर्णन - 1.

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Shiv Puran Ch 181: श्रीकृष्ण के तप से संतुष्ट हुए शिव और पार्वती का उन्ह...

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Shiv Puran Ch 180.2: कोटिरुद्र संहिता का माहात्म्य एवं उपसंहार.

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Shiv Puran Ch 180.1: शिवसम्बन्धी तत्त्वज्ञान का वर्णन तथा उसकी महिमा.

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Shiv Puran Ch 179: शिव, विष्णु, रूद्र और ब्रह्मा के स्वरुप का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 178: मुक्ति और भक्ति के स्वरुप का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 177.3: अनजाने में शिवरात्रि व्रत करने पर एक भील पर शिवजी क...

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Shiv Puran Ch 177.2: शिवरात्रि व्रत महिमा में मृग और मृगी की कथा.

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Shiv Puran Ch 177.1: शिवरात्रि व्रत महिमा में एक भील की कथा.

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Shiv Puran Ch 176: शिवरात्रि व्रत की उद्यापन की विधि.

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Shiv Puran Ch 175.2: शिवरात्रि व्रत की सम्पूर्ण विधि तथा माहात्म्य.

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Shiv Puran Ch 175.1: भगवान शिव को संतुष्ट करने वाले व्रतों का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 174.2: शिव सहस्त्रनाम स्तोत्र का माहात्म्य.

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Shiv Puran Ch 174.1: भगवान विष्णु द्वारा पठित शिवसहस्त्र नामस्तोत्र (अर्...

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Shiv Puran Ch 173: शंकरजी की आराधना से भगवान विष्णु को सुदर्शनचक्र की प्...

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Shiv Puran Ch 172.2: ज्योतिर्लिङ्ग घुश्मेश्वर की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 172.1: घुश्मा की शिवभक्ति से उसके मरे पुत्र का जीवित होना.

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Shiv Puran Ch 171: ज्योतिर्लिङ्ग रामेश्वर की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 170: ज्योतिर्लिङ्ग नागेश्वर की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 169: ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथेश्वर के प्राकट्य की कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 168.2: गंगा का गौतमी या गोदावरी और शिव के त्रियम्बक ज्योति...

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Shiv Puran Ch 168.1: गौतम की आराधना से संतुष्ट हो भगवान शिव का उन्हें दर...

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Shiv Puran Ch 167.2: ऋषियों का छलपूर्वक महर्षि गौतम को गौहत्या में फंसाना.

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Shiv Puran Ch 167.1: त्रियम्बक ज्योतिर्लिंग के प्रसंग में महर्षि गौतम की...

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Shiv Puran Ch 166: वाराणसी तथा विश्वेश्वर का माहात्म्य.

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Shiv Puran Ch 165: ज्योतिर्लिंग विश्वेशवर तीर्थ उत्पत्ति कथा में पंचकोशी...

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Shiv Puran Ch 164.2: ज्योतिर्लिंग भीमशंकर की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 164.1: ज्योतिर्लिंग केदारेश्वर की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 163: विन्ध्य की तपस्या, ओंकार में परमेश्वर लिङ्ग के प्रादु...

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Shiv Puran Ch 162.2: राजा चन्द्रसेन के सामने हनुमान जी का प्राकट्य.

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Shiv Puran Ch 162.1: शिवभक्त राजा चन्द्रसेन और गोपबालक श्रीकर की कथा.

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Shiv Puran Ch 161.2: ज्योतिर्लिंग महाकाल की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 161.1: ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 160.2: प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Shiv Puran Ch 160.1: सोमनाथ उत्पत्ति कथा में दक्ष द्वारा चन्द्रमा को श्र...

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Shiv Puran Ch 159: ऋषिका पर भगवान शिव की कृपा.

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Shiv Puran Ch 158: काशी आदि के विभिन्न लिङ्गों का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 157.2: द्वादश ज्योतिर्लिंगों के उपलिंगों का वर्णन.

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Shiv Puran Ch 157.1: द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन.

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Samasya Samadhan (Santan Prapti) For Deepa Ji By Shree Keshav Chandra Ma...

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Samasya Samadhan (Santan Prapti) For Rachita Ji By Shree Keshav Chandra ...

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Skand Puran Ch 501.2: गोपी सरोवर का निर्माण तथा उसकी महिमा का वर्णन.

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Skand Puran Ch 501.1: गोपियों का द्वारका गमन तथा मयसरोवर की महिमा.

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Skand Puran Ch 506: शंखोद्धार तीर्थ की महिमा.

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Skand Puran Ch 505.2: श्रीतुलसी माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 505.1: द्वारकापुरी और श्रीकृष्ण के दर्शन पूजन का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 504: श्रीकृष्ण तथा रुक्मणि देवी के दर्शन और पूजन की महिमा.

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Skand Puran Ch 503.2: गदातीर्थ आदि विविध तीर्थों के सेवन की महिमा.

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Skand Puran Ch 503.1: सिद्धेश्वरलिङ्ग तथा ऋषितीर्थ का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 502.2: वरुणसरोवर तथा पंचमुख तीर्थ का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 502.1: ब्रह्मकुंड, चंद्रसरोवर आदि का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 500.2: उद्धवजी तथा श्रीकृष्ण विरहपीड़ित गोपियों का संवाद.

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Skand Puran Ch 500.1: विष्णुपदोद्धव तीर्थ की महिमा, उद्धवजी का व्रज में ...

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Skand Puran Ch 499: चक्रतीर्थ तथा रुक्मणिहृद का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 498.3: गोमती में स्नान और भगवद्पूजन की महिमा.

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Skand Puran Ch 498.2: गोमती और चक्रतीर्थ की उत्पत्ति कथा तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 498.1: सनकादि की उत्पत्ति तथा महऋषियों द्वारा सुदर्शन की ...

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Skand Puran Ch 497: द्वारका की महिमा तथा वहां की यात्रा की विधि.

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Skand Puran Ch 496.2: कलियुग में भगवान विष्णु की स्थिति.

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Skand Puran Ch 496.1: कलियुग में भगवान श्रीकृष्ण को कैसे प्राप्त करें?

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Skand Puran Ch 495.3: प्रभास खण्ड का उपसंहार.

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Skand Puran Ch 495.2: वामन जी का बली से ३ पग भूमि ग्रहण करना.

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Skand Puran Ch 495.1: भगवान वामन द्वारा अपने अवतार और कलियुग का वर्णन.

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Skand Puran Ch 494: श्री विष्णु के समस्त अवतारों की कथा.

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Skand Puran Ch 493.2: उत्पात शांति के लिये बलि के द्वारा यज्ञ प्रारम्भ.

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Skand Puran Ch 493.1: नारद जी के द्वारा राजा बलि को उपदेश.

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Skand Puran Ch 492.2: गृहस्थ के लिये आचरणीय शिष्टाचार.

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Skand Puran Ch 492.1: तीर्थों में पूजन और दान की महिमा.

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Skand Puran Ch 491.2: दामोदर माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 491.1: राजा गज और भद्रमुनि का संवाद.

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Skand Puran Ch 490: चंद्रेश्वर, कपिलेश्वर तथा नलेश्वर की महिमा.

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Skand Puran Ch 489.3: गौ और संतों का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 489.2: आपस्तम्ब और नाभाग की कथा.

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Skand Puran Ch 489.1: नारायणगृह तथा जालेश्वर लिङ्ग की महिमा.

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Skand Puran Ch 488: पृथु के गोष्पदतीर्थ में श्राद्ध करने से वेन को स्वर्...

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Skand Puran Ch 487.4: राजा पृथु द्वारा पृथ्वी का दोहन.

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Skand Puran Ch 487.3: राजा वेन और पृथु की कथा.

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Skand Puran Ch 487.2: गोष्पदतीर्थ में श्राद्ध की विधि.

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Skand Puran Ch 487.1: तलस्वामी, शंखावर्त तीर्थ और गोष्पद तीर्थ की महिमा.

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Skand Puran Ch 487.1: तलस्वामी, शंखावर्त तीर्थ और गोष्पद तीर्थ की महिमा.

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Skand Puran Ch 486.2: विविध तीर्थों तथा देवविग्रहों के सेवन की महिमा.

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Skand Puran Ch 486.1: माधव, त्रिपथगा आदि विविध तीर्थों की महिमा.

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Skand Puran Ch 485.2: श्रगालेश्वर तथा गुप्तप्रयाग का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 485.1: भद्रकाली, कुबेर तथा ऋषितोया नदी का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 484.2: कुबेरेश्वर की महिमा, कुबेर के द्वारा शिव की स्तुति.

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Skand Puran Ch 484.1: सुकन्यासरोवर, गोष्पदतीर्थ, गंगेश्वर, पातालगंगा आदि...

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Skand Puran Ch 483.2: अश्वनी कुमारों द्वारा च्यवन मुनि को पुनः युवा करना.

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Skand Puran Ch 483.1: महर्षि च्यवन की कथा.

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Skand Puran Ch 482: भगवान सूर्य के अष्टोत्तर शत (108) नाम.

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Skand Puran Ch 481.2: वाल्मीकि जी की पूर्व कथा.

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Skand Puran Ch 481.1: नन्दादित्य, गंगेश्वर, सूर्यप्राची आदि का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 480: नगरादित्य, पिंगानदी, संगमेश्वर आदि की महिमा.

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Skand Puran Ch 479: संवर्तेश्वर, बल्भद्रेश्वर आदि का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 478: नरकेश्वर की कथा तथा माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 477.2: प्रेततीर्थ की उत्पत्ति कथा.

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Skand Puran Ch 477.1: गौतम और प्रेत संवाद.

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Skand Puran Ch 476: मारकंडेश्वर आदि विवध शिवलिंगों की महिमा.

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Skand Puran Ch 475.2: द्रव्य अभाव में श्राद्ध की विधि.

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Skand Puran Ch 475.1: उत्तम-अधम जन्म, व्यर्थ और सफल दान का वर्णन.

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Skand Puran Ch 474: परायी वस्तु के अपहरण और प्रतिग्रह के दोष.

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Skand Puran Ch 473.3: श्राद्ध में ग्राह्य एवं त्याज्य का वर्णन.

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Skand Puran Ch 473.2: श्राद्ध में सप्त शुद्धि का वर्णन.

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Skand Puran Ch 473.1: श्राद्ध विधि.

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Skand Puran Ch 472: श्राद्ध के विषय में कुछ ज्ञातव्य बातें.

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Skand Puran Ch 471: देवमाता, प्रभासपंचक, रुद्रेश्वर, महाशमशान आदि का महत्व.

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Skand Puran Ch 470.2: कुंतेश्वर, अर्कस्थल तथा त्रिसंगमतीर्थ आदि का माहात...

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Skand Puran Ch 470.1: दशरथेश्वर, भरतेश्वर, लिङ्गचतुष्टय आदि का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 469.3: सावित्री व्रत की विधि तथा महिमा, ब्रह्मा-सावत्री क...

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Skand Puran Ch 469.2: नारदजी की भविष्यवाणी तथा सावित्री का सत्यवान को पु...

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Skand Puran Ch 469.1: सावित्री जन्मकथा तथा सत्यवान को पति चुनना.

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Skand Puran Ch 468: लोमशेश्वर, चित्रापथानदी, रूपकुण्ड आदि का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 467.2: चित्रादित्य की कथा तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 467.1: महाकाली देवी, पुष्करावर्तिका नदी तथा कंकाल भैरव की...

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Skand Puran Ch 466.: भुवनेश्वर तथा सिद्धि-लक्ष्मी की महिमा.2

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Skand Puran Ch 466.1: अक्षमालेश्वर तथा पशुपतेश्वर की महिमा.

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Skand Puran Ch 465: पालीमेश्वर, शांडलेश्वर आदि शिवलिंगों का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 464: रामेश्वर, चित्रंदेश्वर तथा रावणेश्वर की महिमा.

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Skand Puran Ch 463: गोप्यादित्य की स्थापना कथा तथा नील प्रयोग से हानि.

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Skand Puran Ch 462.3: पुष्करेश्वर, भूतेश्वर आदि शिवलिंगों की महिमा.

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Skand Puran Ch 462.2: रामेश्वर तथा लक्ष्मणेश्वर शिवलिंग की कथा तथा माहात...

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Skand Puran Ch 462.1: प्रत्युशेश्वर, अनिलेश्वर तथा प्रभासेश्वर का माहात्...

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Skand Puran Ch 461.2: ब्रह्माजी के 108 नाम तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 461.1: ब्रह्माजी की भक्ति के भेदों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 460: ब्राह्मणों के भेदों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 459.2: ब्रह्माजी की आयु तथा त्रिदेवों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 459.1: बालरूपधारी ब्रह्माजी की महिमा.

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Skand Puran Ch 458: चंद्रेश्वर, चक्रपाणि, दण्डपाणि तथा सम्बदित्य की महिमा.

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Skand Puran Ch 457.2: 11 रुद्रों का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 457.1: पांडवेश्वर लिङ्ग का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 456: आदिनारायण का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 456: आदिनारायण का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 455: योगेश्वरी देवी की कथा तथा महिमा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 176.2: देवी पूजा विधि सुनने के फल.

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Devi Bhagvat Puran Ch 176.1: देवी की सम्पूर्ण पूजा विधि.

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Devi Bhagvat Puran Ch 175.2: देवी की वाह्य पूजन विधि का संछिप्त वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 175.1: देवी की वैदिकी पूजन विधि.

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Devi Bhagvat Puran Ch 174: देवी के द्वारा उनके व्रतों, उत्सवों और पूजन क...

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Devi Bhagvat Puran Ch 173: देवी के द्वारा देवी तीर्थों का वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 172.2: देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश - 7.

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Devi Bhagvat Puran Ch 172.1: देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश - 6.

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Devi Bhagvat Puran Ch 171.2: देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश - 5.

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Devi Bhagvat Puran Ch 171.1: देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश - 4.

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Devi Bhagvat Puran Ch 170.2: देवी द्वारा हिमालय को ज्ञान उपदेश - 3.

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Devi Bhagvat Puran Ch 170.1: देवी का अपना विराट रूप दिखाना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 169.5: देवी द्वारा हिमालय को ज्ञान उपदेश - 2.

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Devi Bhagvat Puran Ch 169.4: देवी द्वारा हिमालय को ज्ञान उपदेश - 1.

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Devi Bhagvat Puran Ch 169.3: हिमालय द्वारा देवी से वेदांत रहस्य का ज्ञान...

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Devi Bhagvat Puran Ch 169.2: सभी देवताओं द्वारा देवी की स्तुति.

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Devi Bhagvat Puran Ch 169.1: देवी का प्राकट्य और उनके मनोहर स्वरुप का वर...

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Devi Bhagvat Puran Ch 168.2: देवी के सिद्धपीठों की महिमा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 168.1: देवी के 108 सिद्धपीठों तथा वहां विराजने वाल...

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.6: देवी के सिद्धपीठों की उत्पत्ति कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.5: भगवती की कृपा से शिव और विष्णु को पुनः शक्त...

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.4: महागौरी, महालक्ष्मी के अन्तर्धान तथा पुनः प...

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.3: भगवती जगदम्बा की महिमा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.2: जगदम्बा के दुर्गा नाम पड़ने की कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 167.1: जगदम्बा के शताक्षी तथा शताम्बरी नाम पड़ने की...

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Devi Bhagvat Puran Ch 166.4: देवताओं का आगमन और हरिश्चंद्र का स्वर्ग गमन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 166.3: राजा हरिश्चंद्र और रानी की शरीर त्याग की तै...

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Devi Bhagvat Puran Ch 166.2: परस्पर पहचानने पर राजा हरिश्चंद्र और रानी श...

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Devi Bhagvat Puran Ch 166.1: राजा हरिश्चंद्र और रानी शैव्या का परस्पर पह...

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Devi Bhagvat Puran Ch 165.3: रानी शैव्या के प्रति चाण्डाल का निर्शंस व्य...

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Devi Bhagvat Puran Ch 165.2: रोहित की मृत्यु पर रानी का विलाप.

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Devi Bhagvat Puran Ch 165.1: सांप के काटने से रोहित की मृत्यु.

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Devi Bhagvat Puran Ch 162.1: विश्वामित्र की दक्षिणा चुकाने के लिये हरिश्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 162.1: विश्वामित्र की दक्षिणा चुकाने के लिये हरिश्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.4: दक्षिणा के लिये हरिश्चंद्र के साथ विश्वामित...

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.4: दक्षिणा के लिये हरिश्चंद्र के साथ विश्वामित...

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.3: विश्वामित्र की कपटपूर्ण बातों में आकर हरिश्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.3: विश्वामित्र की कपटपूर्ण बातों में आकर हरिश्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.2: हरिश्चंद्र का मायावी सूअर को मारने जाना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 161.1: राजा हरिश्चंद्र पर विश्वामित्र का कोप.

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Devi Bhagvat Puran Ch 160.3: हरिश्चंद्र की कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 160.2: विश्वामित्र के तपोबल से त्रिशंकु का सदेह स्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 160.1: त्रिशंकु पर विश्वामित्र की कृपा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 159.5: विश्वामित्र की पत्नी की कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 159.4: सत्यव्रत का सदेह स्वर्ग जाने का आग्रह.

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Devi Bhagvat Puran Ch 159.3: त्रिशंकु की श्राप से मुक्ति तथा राज्याभिषेक.

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Devi Bhagvat Puran Ch 159.2: भगवती की कृपा से त्रिशंकु की श्राप से मुक्ति.

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Devi Bhagvat Puran Ch 159.1: सत्यव्रत का त्रिशंकु नाम होने का कारण.

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Devi Bhagvat Puran Ch 158.3: पिता के उदर से राजा मान्धाता का जन्म.

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Devi Bhagvat Puran Ch 158.2: इक्ष्वाकु वंश का वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 158.1: रेवती-बलराम का विवाह.

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Devi Bhagvat Puran Ch 155.1: सूर्यवंश का वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 154: जन्मेजय का व्यासजी से सृष्टिविषयक प्रश्न.

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Devi Bhagvat Puran Ch 147: नारद और पर्वत मुनि का परस्पर श्राप.

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Devi Bhagvat Puran Ch 146: व्यास-नारद संवाद.

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Devi Bhagvat Puran Ch 145.3: एकावली और एकवीर का विवाह.

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Devi Bhagvat Puran Ch 145.2: एकवीर के द्वारा कालकेतु का वध.

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Devi Bhagvat Puran Ch 145.1: राजा एकवीर का कालकेतु वध के लिये उसकी नगरी ...

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Devi Bhagvat Puran Ch 144.2: देवी कृपा से यशुवति का कालकेतु की कैद से नि...

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Devi Bhagvat Puran Ch 144.1: एकावली का कालकेतु के द्वारा हरण.

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Devi Bhagvat Puran Ch 143.3: एकावली की जन्म कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 143.2: एकवीर को वन में एकावली की सखी यशुवति का मिलना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 143.1: हरिवर्मा द्वारा एकवीर का राज्याभिषेक करके व...

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Devi Bhagvat Puran Ch 142.2: भगवान विष्णु द्वारा अपना पुत्र एकवीर राजा ह...

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Devi Bhagvat Puran Ch 142.1: लक्ष्मी पुत्र एकवीर की कथा का आरम्भ.

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Devi Bhagvat Puran Ch 141.2: घोडेरुपी विष्णु द्वारा घोडीरूपा लक्ष्मी को ...

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Devi Bhagvat Puran Ch 141.1: शंकरजी द्वारा विष्णुजी के पास दूत भेजना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 140.2: लक्ष्मीजी द्वारा भगवान शिव और भगवान विष्णु ...

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Devi Bhagvat Puran Ch 140.1: भगवान विष्णु के श्राप से घोड़ी बनी लक्ष्मी द...

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Devi Bhagvat Puran Ch 140.1: भगवान विष्णु के श्राप से घोड़ी बनी लक्ष्मी द...

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Devi Bhagvat Puran Ch 139.2: हैहयीवंशीय क्षत्रियों की नेत्रज्योति पुनः व...

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Devi Bhagvat Puran Ch 139.1: देवीकृपा से एक ब्राह्मणी की जांघ से एक तेजस...

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Devi Bhagvat Puran Ch 138.2: हैहयवंशीय क्षत्रियों द्वारा भृगुवंश को खत्म...

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Devi Bhagvat Puran Ch 138.1: हैहयवंशीय क्षत्रियों द्वारा भृगुवंशीय ब्राह...

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Devi Bhagvat Puran Ch 137.2: राजा निमि ने वशिष्ठजी को श्राप क्यों दिया था.

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Devi Bhagvat Puran Ch 137.1: राजा निमि के नेत्र पलकों में रहने की कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 136.2: वशिष्ठ जी के मैत्रावरुणि नाम का कारण.

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Devi Bhagvat Puran Ch 136.1: वशिष्ठ जी और राजा निमि का एक दूसरे को श्राप...

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Devi Bhagvat Puran Ch 135: वशिष्ठ-विश्वामित्र की कलह का वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 134: तीर्थचित्त शुद्धि तथा तीर्थ की महत्ता का वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 133: Yug Dharm Varnan

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Devi Bhagvat Puran Ch 132: त्रिविध कर्म वर्णन.

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Devi Bhagvat Puran Ch 131.3: मुनियों के श्राप से नहुष का पतन तथा उसे सर्...

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Devi Bhagvat Puran Ch 131.2: नहुष का मुनियों की पालकी पर सवार होना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 131.1: इन्द्राणी पर देवी की कृपा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 130.2: बृहस्पति की सम्मति से शची का नहुष के पास जाना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 130.1: इन्द्र पत्नी शची को पाने के लिये नहुष का हठ...

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Devi Bhagvat Puran Ch 129: नहुष को इन्द्रपद की प्राप्ति और नहुष की शची प...

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Devi Bhagvat Puran Ch 128.2: ब्रह्महत्या के भय से इन्द्र का मानसरोवर में...

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Devi Bhagvat Puran Ch 128.1: वृत्रासुर का वध.

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Devi Bhagvat Puran Ch 127.2: वृत्रासुर वध के लिये देवताओं द्वारा जगदम्बि...

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Devi Bhagvat Puran Ch 127.1: देवताओं द्वारा वृत्रासुर वध की योजना बनाना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 126.2: वृत्रासुर के द्वारा इन्द्र को निगल लेना.

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Devi Bhagvat Puran Ch 126.1: वृत्रासुर की तपस्या तथा वर प्राप्ति.

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Devi Bhagvat Puran Ch 125.2: इन्द्र को हरा वृत्रासुर का अपने पिता के पास...

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Devi Bhagvat Puran Ch 125.1: वृत्रासुर के द्वारा इन्द्र की पराजय.

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Devi Bhagvat Puran Ch 124.2: त्वष्टा के यज्ञ से वृत्र का प्रादुर्भाव.

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Devi Bhagvat Puran Ch 124.1: इन्द्र के द्वारा विश्वरूप त्रिशरा मुनि का वध.

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Devi Bhagvat Puran Ch 123.2: त्वष्टा प्रजापति की कथा.

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Devi Bhagvat Puran Ch 123.1: वृत्रासुर के प्रसंग में ऋषियों का प्रश्न, स...

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Skand Puran Ch 449.2: राजा शशिबिन्दु के पूर्वजन्म की कथा.

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Skand Puran Ch 449.1: केदारलिङ्ग महिमा में राजा शशिबिन्दु की कथा.

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Skand Puran Ch 449.1: केदारलिङ्ग महिमा में राजा शशिबिन्दु की कथा.

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Skand Puran Ch 448: कपर्दी की अग्रपूजा का कारण तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 447: सरस्वती नदी की महिमा तथा वहां स्नान, दान तथा श्राद्ध...

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Skand Puran Ch 446.2: पंचस्रौता सरस्वती का आविर्भाव तथा माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 446.1: सोमनाथ के दर्शन पूजन की महिमा.

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Skand Puran Ch 445: समुन्द्र स्नान की विधि तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 444.2: कलियुग में दिए दान का फल तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 444.1: सोमनाथ की यात्रा विधि.

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Skand Puran Ch 443.2: सोमवार व्रत की सम्पूर्ण विधि तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 443.1: सोमवार व्रत महिमा में गन्धर्भसेना की कथा.

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Skand Puran Ch 442.3: भगवान दैत्यों को वरदान क्यों देते हैं.

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Skand Puran Ch 442.2: चन्द्रमा द्वारा सोमनाथ मंदिर का निर्माण.

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Skand Puran Ch 442.1: चन्द्रमा के द्वारा प्रभासक्षेत्र में शिव की स्तुति...

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Skand Puran Ch 441: सृष्टि कथा.

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Skand Puran Ch 440: चन्द्रमा की उत्पत्ति तथा उनके द्वारा औषधि आदि का पोषण.

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Skand Puran Ch 439.3: सूर्यदेव की पूजा की सम्पूर्ण विधि, सूर्यग्रहण का क...

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Skand Puran Ch 439.2: दन्तधावन की विधि.

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Skand Puran Ch 439.1: अर्कस्थल का माहात्म्य, आदित्य की महिमा.

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Skand Puran Ch 438: प्रभास में सूर्यदेव, सिद्धेश्वरलिङ्ग तथा सिद्धलिंग क...

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Skand Puran Ch 437.2: भगवान शिव के प्रभास क्षेत्र में भगवान विष्णु के हो...

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Skand Puran Ch 437.1: प्रभासक्षेत्र में भगवान शिव का स्वरुप, पार्वती द्व...

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Skand Puran Ch 429: दुशील द्वारा निम्बेश्वर की स्थापना तथा 11 रुद्रों का...

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Skand Puran Ch 428.2: दुशील की दुर्वासा से भेंट.

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Skand Puran Ch 428.1: दुशील नामक ब्राह्मण की कथा.

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Skand Puran Ch 427: पृथ्वीदान विधि तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 426: सिद्धेश्वर की महिमा और तुलादान का महत्व.

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Skand Puran Ch 425: शिवरात्रि पूजा विधि, कथा तथा महिमा.

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Skand Puran Ch 424: चातुर्मास्य व्रत का पालनीय नियम तथा उनकी महिमा.

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Skand Puran Ch 423: नरकों और पापों से मुक्त होने का उपाय तथा भगवान जलशाय...

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Skand Puran Ch 436.2: सोमनाथ की महिमा.

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Skand Puran Ch 436.1: सोमेश्वर की महिमा.

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Skand Puran Ch 435: सोमनाथ के 8 तथा पार्वती के 18 नामों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 434: सोमनाथ के दिव्य स्वरुप का वर्णन.

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Skand Puran Ch 433.2: भगवान शिव द्वारा प्रभासक्षेत्र की महिमा तथा रक्षकग...

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Skand Puran Ch 433.1: प्रभासतीर्थ की सीमा तथा क्षेत्र का वर्णन.

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Skand Puran Ch 432.2: भगवान शिव द्वारा तीर्थवर्णन में प्रभासक्षेत्र की व...

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Skand Puran Ch 432.1: शिव-पार्वती संवाद.

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Skand Puran Ch 431.3: सूतजी द्वारा पुराणों के लक्षण तथा महिमा बताना.

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Skand Puran Ch 431.2: सूत जी द्वारा सभी पुराणों की श्लोक संख्या, महिमा त...

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Skand Puran Ch 431.1: सूत जी द्वारा प्रभास खण्ड का आरम्भ तथा पुराणों, उप...

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Skand Puran Ch 422.3: भीष्म द्वारा मृत्यु के बाद की स्थिति का वर्णन.

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Skand Puran Ch 422.2: सपिंडीकरण की आवश्यकता.

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Skand Puran Ch 422.1: एकोदिष्ट और पार्णव श्राद्ध का वर्णन.

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Skand Puran Ch 421: श्राद्धकर्ता तथा श्राद्धभोक्ता के लिए नियम.

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Skand Puran Ch 420.2: श्राद्ध विधि तथा मन्वादि पुण्य तिथियों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 420.1: श्राद्ध में विहित और निषिद्ध ब्राह्मणों का वर्णन.

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Skand Puran Ch 419: श्राद्ध की आवश्यकता तथा समय.

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Skand Puran Ch 418: श्राद्ध कल्प.

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Skand Puran Ch 417.2: धन्वन्तरी जी की कुष्ठ रोग से मुक्ति की कथा.

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Skand Puran Ch 417.1: विश्वामित्र तीर्थ की महिमा.

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Skand Puran Ch 416.2: ताम्बूलपान (पान खाने) के दोष तथा सुर्ती खाने का नि...

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Skand Puran Ch 416.1: शंखतीर्थ की महिमा में राजा दम्भ की कथा.

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Skand Puran Ch 415.2: अहल्या का श्रापोद्धार.

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Skand Puran Ch 415.1: हाटकेश्वर क्षेत्र के 4 प्रसिद्ध तीर्थों की महिमा.

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Skand Puran Ch 413.2: भगवान शिव का रत्नवती तथा ब्राह्मण कन्या को वरदान.

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Skand Puran Ch 413.1: ब्राह्मण कन्या और शूद्रराज कन्या की तपस्या.

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Skand Puran Ch 412.2: परावसु का मद्यपान प्रायश्चित के लिए राजकन्या रत्नव...

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Skand Puran Ch 412.1: परावसु के द्वारा मद्यपान का प्रायश्चित.

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Skand Puran Ch 411: ब्राह्मणकन्या और राजकन्या का अनुपम प्रेम.

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Skand Puran Ch 410: हाटकेश्वर क्षेत्र में पुष्कर तीर्थ के आगमन का समय.

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Skand Puran Ch 409: अतिथि सत्कार का माहात्म्य.

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Skand Puran Ch 408: हाटकेश्वर क्षेत्र में तीनों पुष्कर क्षेत्रों के आगमन...

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Skand Puran Ch 407.2: लक्ष्मीदेवी के द्वारा पंचपिण्डिका गौरी की उत्पत्ति...

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Skand Puran Ch 407.1: लक्ष्मीदेवी द्वारा भगवान विष्णु को अपने पूर्वजन्म ...

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Skand Puran Ch 406: पंचपिण्डिका गौरीपूजा से अमा की सौभाग्यवृद्धि, अमा के...

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Skand Puran Ch 405.2: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठ जी के वध के लिये शक्ति भ...

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Skand Puran Ch 405.1: विश्वामित्र की तपस्या, ब्राह्मणपद की प्राप्ति.

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Skand Puran Ch 404.3: विश्वामित्र और वसिष्ठ का युद्ध.

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Skand Puran Ch 404.2: विश्वामित्र की जन्मकथा, राज्यप्राप्ति.

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Skand Puran Ch 404.1: ऋचीक मुनि का गाधीपुत्री के साथ विवाह.

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Skand Puran Ch 403: चण्डशर्मा द्वारा 27 शिवलिङ्गों का पूजन, शिवकृपा की प...

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Skand Puran Ch 402: सब पापों की शुद्धि के लिये पुरश्चरण व्रत की विधि तथा...

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